बेटे की कामुकता, माँ की चुदाई
मैं दूध सी गोरी मस्त फिगर वाली विवाहित महिला हूं. मेरी कामुकता किसीकी भी
वासना जगा सकती है. एक दिन मेरा बेटा मुझे देख कर अपना लंड मसला रहाथा तो …
दोस्तो, मैं मंजू देवी, मैं दूध की तरह गोरी, काले बालों वाली
और 38-28-36 के मस्त फिगर वाली एक विवाहित महिला हूं. मैं इतनी कामुक
हूँ किकिसी की भी प्यास को जगा सकती हूं.
मैं आप सबको अपनी सच्ची सेक्स कहानी बताने जा रही हूं. लेकिन पहले मैंअपने और
अपने परिवार के सभी सदस्यों के बारे में आपको बता देना चाहती हूँ.
मेरे घर में हम
चार लोग हैं. मैं, मेरे पति अमित, मेरी बेटी काजल और मेराबेटा राजू. मेरे
बेटे राजू की उम्र साढ़े अठारह साल है और काजल की उम्र 20 साल है.
मेरे पति काम के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते हैं जिस कारण मैं अपनीप्यास
अक्सर उंगलियों से बुझाया करती थी. लेकिन दोस्तो, आपको तो मालूम
हीहै कि उंगली में वो बात कहां होती है, जो कि लंड से चुदने में है. मगर मैंकर भी
क्या सकती थी.
एक दिन की बात है, मैं सुबह सुबह घर में झाड़ू लगा रही थी. तो मैंनेदेखा कि
मेरा बेटा मुझे बहुत बड़ी गौर से देख रहा है और पैंट में अपने लंडको हल्के हल्के
मसल रहा था.
मैंने ध्यान दिया तो देखा कि ये तो मेरे दूध की फैक्ट्री को देख रहा है.मेरे
मम्मे मेरे बड़े गले वाली नाइटी में आधे से ज्यादा दिख रहे थे. पहलेतो मुझे गुस्सा
आया, फिर मैंने सोचा कि आखिर वो भी तो जवान हो गया है. मैंये भी समझती थी कि मुझे
देख कर किसका मन नहीं टूटेगा … चाहे वो कोई भी हो.मेरी चुत में खुद आग लगी थी.
फिर मैं मुस्कुराते हुए अपने काम में लग गई और उसे अनदेखा करने की कोशिश करने
लगी. इधर समस्या यह थीमेरे जिस्म की
प्यास भी बहुत दिनों से नहीं बुझी थी, सो मैं उसके लंड को अनदेखा भी नहीं कर पा
रही थी.
इस घटना के बाद मैं उस पर नजर रखने लगी. मैंने पाया कि ये तो अक्सर मुझे देखता
रहता है और मुझे छूने की कोशिश करता है.
मैं भी उससे कुछ नहीं बोली और देखती रही कि ये क्या क्या करता है … और किस हद
तक जाता है.
कुछ दिन के बाद मैं सुबह किचन में काम कर रही थी. मेरी बेटी काजल उन दिनों एक
रिलेटिव के यहां गई हुई थी.
उसी समय राजू आया
और बोला- मां मुझे प्यास लगी है.
मैं बोली- प्यास
लगी है तो पानी पी लो … इसमें मैं क्या करूं?
राजू ने एकदम साफ़
शब्दों में बोला- मां तुम अपना पिछवाड़ा तो इधर करो.
मैं ये सुन कर सन्न रह गई. दरअसल मैं फ्रिज से सट कर खड़ी थी. लेकिन मैंने इस
बात पर ध्यान नहीं दिया.
मैं तेज स्वर में
उससे बोली- क्या बोला तूने?
इस पर उसने मेरे पिछवाड़े को पकड़ कर साइड में कर दिया और फ्रिज से पानी की
बोतल लेकर चला गया.
मैं सोचने लगी कि
आखिर उसकी हिम्मत कितनी बढ़ गई कि उसने मेरे पिछवाड़े को टच कर लिया.
मैंने उसे छूट दे रखी थी, लेकिन मैं भी क्या करती … जब राजू इस तरह सेदेखता है … टच
करता है तो मुझे अच्छा लगता है. हालांकि उसने आज से पहले कभीइतनी हिम्मत नहीं की
थी.
घर का काम खत्म करने के बाद हम दोनों ने खाना खाया. फिर बाजार जाने का
प्रोग्राम बन गया. मुझे कुछ कपड़े खरीदने थे.
मैंने उससे बाजार चलने का कहा, तो वो राजी हो गया. हम दोनों तैयार करबाजार के लिए निकल
पड़े. मैंने ग्रीन कलर की साड़ी पहनी थी, जिसका ब्लाउजकाफी डीप गले वाला था.
कुछ दूर पैदल चलकर हमने बस पकड़ ली. बस में बहुत भीड़ थी. हम दोनों बीच में
जाकर खड़े हो गए. राजू मेरे पीछे चिपक कर खड़ा था.
थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा कि राजू पीछे से अपनी कमर को ऊपर नीचे कररहा था.
इससे उसका लंड मुझे महसूस हो रहा था. मैं उससे कुछ नहीं बोलीक्योंकि मुझे भी अच्छा
लग रहा था.
थोड़ी देर बाद राजू ने मेरी कमर पर हाथ रखा और मेरे किसी तरह के विरोधको न
पाकर उसने अपना हाथ आगे लाकर मेरे पेट पर रख दिया. अगले ही पल वो मेरीनाभि को
सहलाने लगा.
मैंने सोचा कि अब इसकी हिम्मत ज्यादा ही बढ़ रही है, अगर इसे नहीं रोका
… तो यह पब्लिक प्लेस में कुछ ऐसा वैसा ना कर बैठे.
मैं उसे बोलने ही वाली थी कि हमारा स्टॉप आ गया और हम दोनों उतर गए.राजू ने
मेरे हाथ में हाथ डाला और हम चलने लगे. मैंने सोचा कि चलो इतना तोनॉर्मल है. मैंने
बस वाले मैटर को वहीं छोड़ दिया, उससे कुछ नहीं कहा.
राजू मुझसे बोला- मां, क्या क्या खरीदना है?
मैं बोली- बेटा,
मुझे कुछ नाइटी
वगैरह खरीदना है और कुछ इनरवियर भी लेने हैं.
हम एक शोरूम में गए और नाइटी पसंद करने लगे. सेल्समैन मुझे नाइटी दिखा रहा था.
राजू ने एक नाइटी
की तरफ इशारा किया और सेल्समैन से कहा- भैया उस तरह की नाइटी दिखाओ ना.
दरअसल वह एक हाफ नाइटी थी जो घुटनों से कुछ ऊपर तक रहती है.
मैं सेल्समैन को
मना करने वाली थी कि राजू ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मैं कुछ ना बोल पाई.
राजू ने खुद एक ब्लैक कलर की हाफ नाइटी पसंद की. मैंने एक क्रीम कलर की फुल
नाइटी पसंद कर ली.
मैं दोनों को लेकर ट्रायल रूम में चली गई. पहले मैंने फुल नाइटी पहनी, उसका साइज बिल्कुल
सही था. उसके बाद मैंने अपने बेटे की पसंद की हुई हाफनाइटी पहनी और शीशे में खुद
को देखने लगी. उस नाइटी में मेरी आधे चूचे दिखरहे थे और घुटनों के नीचे का पूरा
इलाका नंगा था. इस तरह की नाइटी मैंपहनना चाहती थी, लेकिन कभी पहन ना
पाई.
मैंने सोचा कि चलो आज अपने बेटे की पसंद से इसे लेकर अपनी ये इच्छा भीपूरी कर
लेती हूं. मेरे बेटे की तमन्ना भी पूरी हो जाएगी. मैंने उस नाइटीमें अपने मोबाइल
से एक सेल्फी पिक ले ली.
तभी राजू ने बाहर से नॉक किया और बोला- मां, मैंने कुछ और पसंद
किया है, इसे भी ट्राई कर लो.
मैंने हाथ बढ़ा कर
उससे कपड़े ले लिए. मैंने देखा तो ये एक ब्रा थी.
मैं दरवाजे की झिरी से उससे बोली- बेटा, ये तुम रहने दो,
यह मैं खुद देख
लूंगी.
राजू धीरे से
बोला- मां तुम कितनी बार अन्दर बाहर आओगी. इस बार मुझे ही पसंद करने दो. तुम बस
पहन कर साइज़ चैक करती जाओ.
मैं बोली- ठीक है
बेटा … लेकिन ये साइज छोटा है.
राजू बोला- आपकी
साइज क्या है … आप बता दो?
मैंने अपनी साइज़ 36DD
उसे बता दी और
बोली- ट्राई करने की जरूरत नहीं है, तुम अपनी पसंद से ले लो. मैं तब तक कपड़े
पहन लेती हूं.
थोड़ी देर बाद मैं बाहर आ गई. सारे कपड़ों का बिल बनवाया और हम वहां से निकल
आए.
हम लोगों ने घर के लिए बस पकड़ ली. भीड़ के कारण हम दोनों फिर से उसीतरह खड़े
हो गए और राजू फिर से अपनी हरकतें करने लगा. मैं भी इसका मजा लेनेलगी. इस बार उसने
मेरे दूध भी दबा कर मजा लिया.
थोड़ी देर में हम दोनों घर पहुंच गए. तब तक शाम के 7:00 बज गए थे. मैं रात
के खाने का इंतजाम करने लगी.
राजू मेरा मोबाइल चला रहा था, तभी वह अचानक चिल्लाया- वाह वाह मां, तुम तो बिल्कुल
हुस्न की परी लग रही हो.
तब मुझे ध्यान में
आया कि वो मेरी नाइटी वाली फोटो देख रहा है. मैं हंस कर बोली- आखिर पसंद किसने की
है.
राजू किचन में आया और उसने पीछे से मेरी कमर को पकड़ लिया. वो बोला- मां एक
बार प्लीज नाइटी पहन कर दिखाओ ना!
मैं बोली- बेटा
अभी बहुत काम है … बाद में दिखाऊंगी.
थोड़ी देर बाद खाना तैयार हो गया. हम दोनों ने खाना खा लिया.
फिर राजू बोला- मां अब दिखाओ ना पहन कर!
मैं मुस्कुराकर
बोली- ठीक है बेटा तुम इंतजार करो … मैं चेंज करके आती हूं.
मैं अपने रूम में चली गई. थोड़ी देर बाद मैं चेंज करके रूम से निकली, तोराजू मुझे बस
देखता ही रह गया. उसके सामने ट्रांसपेरेंट नाइटी और अन्दरमें ट्रांसपेरेंट ब्रा
पैंटी पहने हुए एक हुस्न की परी जैसे खड़ी थी.
राजू आह भरता हुआ
बोला- मां तुम तो कयामत की देवी लग रही हो … अगर तुम मेरीमां नहीं होती, तो मैं तुमसे शादी
कर लेता और जम कर चोदता.
उसकी खुली बात सुन कर मैं गनगना गई. मैं भी खुलते हुए बोली- क्यों बेटा शादी
के बाद ही चोदोगे … ऐसे नहीं चोद सकते क्या?
यह सुनते ही उसे मानो 440 वोल्ट का झटका लगा. उसने झपटते हुए मुझे दबोच लिया और किस
करने लगा. मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी.
दस मिनट बाद हम दोनों की चूमाचाटी खत्म हुई.
राजू बोला- मां, मैं तो आपको कब से चोदना चाह रहा था, पर डर रहा था कि
आप मानोगी या नहीं.
मैं बोली- बेटा
मुझे अगर नहीं करवाना होता, तो मैं तुम्हें बस में ही थप्पड़ जड़ देती.
राजू बोला- अच्छा
मां … मतलब तुम सुबह से ही चुदने के लिए तैयार थीं … अगरमुझे पहले पता होता,
तो बाजार जाता ही
नहीं … दिन भर तुमको चोदता रहता.
मैं बोली- बेटा
अभी क्या बिगड़ा है … अब रात भर चोद लो.
राजू ने मुझे गोद में उठाया और बेड पर लेटा दिया. वो मेरी चिकनी टांगोंको
चाटने लगा, चूसने लगा. मुझे ऐसा लग रहा था मानो वो पैर में लगी किसीमलाई को चाट रहा हो.
मेरी चिकनी टांगों को चाटते चाटते वह मेरी कदली जांघोंतक आ गया.
मैंने उसे रुकने को कहा और मैंने अपनी नाइटी उतार कर बोली- बेटा, मेरे दूध नहीं
पियोगे?
राजू बोला- मां आज
तेरे दोनों मटकों का सारा का सारा दूध पी जाऊंगा … पूरा निचोड़ लूंगा.
अब राजू मेरी एक
चूची को दबा कर पीने लगा. वो ब्रा के ऊपर से ही दांत से चूची काटने लगा.
मैंने खुद ब्रा पैंटी को खोल दिया.
राजू बोला- मां,
तुम्हारी चुत पर
तो बाल हैं.
मैं चुत सहलाते
हुए बोली- बेटा झांटों को साफ़ करने का टाइम ही नहीं मिला औरवैसे भी बाल वाली चूत
का भी अपना ही मजा है. आज ये मजा ले लो, बाद मेंचिकनी चूत का भी मजा ले लेना.
ये सुनकर वो अपने काम में लग गया. मेरा बेटा मेरी चूचियों को ऐसे चूसरहा था
मानो कोई छोटा बच्चा दूध पी रहा हो. बीच-बीच में वह मेरे मम्मों कोकाट भी लेता था,
जिससे मैं चिल्ला
उठती थी. इस सबमें मुझे बहुत मजा आ रहाथा.
मैं उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली- बेटा तुम भी तो अपने कपड़े उतारो.
राजू ने एक क्षण
में अपने सारे कपड़े उतार दिए और वो पूरा नंगा हो गया.
मैं तो उसका लंड देख कर देखती ही रह गई … क्या मोटा तगड़ा लंड था.
मुझसे रहा नहीं
गया और मैंने झट से उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया और अपने बेटे के मोटे लंड
को चूसने लगी.
राजू तो मानो सातवें आसमान पर पहुंच गया था. जल्दी ही हम दोनों 69 कीपोजीशन में आ
गए. राजू मेरी चूत चाट रहा था और मैं उसका लंड चूस रही थी.
कुछ मिनट बाद राजू बोला- मैं झड़ने वाला हूं.
मैंने बोला- बेटा
मेरे मुंह में ही अपनी मलाई छोड़ दे … मैं इसे पीना चाहती हूं और तू भी मेरा पानी
पी जा.
हम दोनों एक ही साथ झड़ गए और दोनों ने एक दूसरे के रस का रसपान किया.
राजू बोला- यह तो अमृत के समान है … मैं इसे रोज पीना चाहूंगा.
मैं बोली- बेटा
तुमको जब मन हो, पी लेना … अभी तो घर में कोई नहीं है.
राजू बोला- मां,
लेकिन दीदी आ
जाएगी, तब कैसे होगा?
मैं बोली- तब का
तब देखेंगे.
राजू मेरी चूत को अभी भी चाट रहा था, जिसके कारण मैं जल्दी ही फिर सेगर्म हो
गई. मैं बोली- बेटा राजू अब मुझे मत तड़पाओ … अपना लंड मेरी चूतमें डाल दो … चोद
दो मुझे और बन जाओ मादरचोद.
राजू ने बिना देर किए अपने लंड को मेरी चुत पर सैट करके एक धक्का देमारा. मेरी
चूत गीली थी, जिस कारण से उसका आधा लंड अन्दर घुसता चला गया.
मैं चिल्ला उठी-
अरे बेटा आराम से करो … मैं कौन सी भागी जा रही हूं.
राजू बोला- मां
तुम तो पापा से इतनी बार चुदवा चुकी हो, फिर तुम्हें क्यों दर्द हो रहा है?
मैं बोली- बेटा एक
तो तुम्हारे पापा बहुत दिन से यहां आए नहीं. … और तुम्हारा लंड तुम्हारे पापा से
बहुत मोटा है.
थोड़ा रुकने के बाद उसने एक और धक्का मारा और अपना पूरा लंड मेरे अन्दर उतार
दिया. मैं दर्द से मरी जा रही थी.
राजू मेरे ऊपर चढ़ा
हुआ धीरे धीरे अपने लंड को पेल रहा था, मैं नीचे कराहरही थी- आह आह उई मां … मर
गई आह आह्हह … उह … मर गई मैं तो … साले मारडाला रे.
थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कम हो गया और मैं भी मजा करने लगी. मैं नीचे से गांड
उठा उठा कर राजू का साथ देने लगी.
मैं बड़बड़ाते हुए
बोल रही थी- आंह चोद बेटा … और जोर से चोद … बना दे मेरी चुत को भोसड़ा. … बना ले
मुझे अपनी रंडी.
राजू बोला- आज तो
मैं तुझे अपनी रंडी बनाकर ही छोडूंगा … तुझे इतना चोदूंगा … इतना चोदूंगा कि पापा
से चुदवाना भूल जाओगी.
राजू की सांसें तेज चल रही थीं, तो मैंने राजू को रुकने का इशारा किया.
वो रुका तो मैं राजू को नीचे करके में उसके ऊपर आ गई. मैंने उसके लंड कोअपनी
चूत में सैट किया और लंड पर बैठती चली गई. मुझे बड़ी राहत सी मिल रहीथी. फिर मैं
अपने बेटे के लंड पर अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदने लगी.
इस दौरान मेरी चूचियां गजब उछल रही थीं, जिन्हें राजू पकड़
का मसल रहा था और चूस रहा था.
लगभग आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं झड़ गई और शांत हो गई.
राजू अभी नहीं झड़ा था. उसने मुझे फिर से नीचे लिटा दिया और अपना काम चालू कर
दिया.
थोड़ी ही देर में राजू बोला- मां मैं भी झड़ने वाला हूं … अपना पानी कहां
निकालूं?
मैं गांड उठाते
हुए बोली- बेटा तुम अपना पानी अन्दर ही छोड़ दो … मैं इसे महसूस करना चाहती हूं.
ये सुनकर राजू ने कुछ जोरदार धक्के मारे और इसी के साथ उसने भी अपनापानी मेरी
चुत में छोड़ दिया. वो निढाल होकर मेरे ऊपर लेट गया. हम दोनोंकाफी थक गए थे. एक तो
मार्केट की थकान थी, फिर चुदाई की हो गई. कब हमेंनींद आ गई, पता ही नहीं चला.
सुबह उठ कर क्या क्या हुआ, ये अगले भाग में लिखूंगी.
सेक्स एक जरूरत है और किसी के बीच में हो सकता है. समाज ने रिश्तों कोबनाया है,
लेकिन किसी महिला
को अतृप्त होने पर बाहर किसी के साथ अवैधसम्बन्ध बनाने से ज्यादा सुरक्षित है कि
वो घर के किसी मर्द से चुदाई कारिश्ता कायम कर ले. इसमें सभी की अपनी अपनी राय हो
सकती है. मुझे लगता हैकि मैंने अपने बेटे से चुद कर ठीक किया है. आपको मां बेटे की
चुदाई कीकहानी आपको कैसी लगी, जरूर लिखें.


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