Girlfriend Ki Chudai Aur Bhabhi Ki Basana Adult Sex Story in Hindi Part- 2


गर्लफ्रेंड की चुदाई और भाभी की बासना 

अगले दिन वो चला गया.

मैंने आकांक्षा को कॉल किया और बोला- कमरे पर चलते हैं … आ जाओ.
इस पर उसने बोला- कुणाल आज नहीं … कल चलेंगे.
Adult Sex Story in Hindi

मैंने भी उससे ज़्यादा ज़बरदस्ती नहीं की और कुछ देर यहां वहां की बातें करके मैंने फोन रख दिया.
अगले दिन मैं और आकांक्षा तकरीबन 11 बजे कमरे पर पहुंचे और चुपके सेसीधे ही ऊपर की तरफ चल दिए. तभी सामने से भाभी आती हुई दिखाई दी. उसके हाथमें बाल्टी थी और उसके कपड़े भी थोड़े थोड़े भीगे हुए थे. शायद वो ऊपर कपड़ेसुखाने के लिए डालकर आयी थी. उसने मुझे और आकांक्षा को देखा और धीरे सेमुस्कुरा कर नीचे चली गयी.

मैं और आकांक्षा ने कमरे में आकर कमरे की कुंडी लगाई. अन्दर से आकांक्षासामने बेड पर बैठी हुई मुस्कुरा रही थी. मैं भी उसके पास जाकर बैठ गया औरउसका हाथ अपने हाथ में ले लिया. उस पर किस किया. आकांक्षा ने आंखें बंद करली थीं.

आकांक्षा आज भी सेक्स करते समय ऐसे शर्माती थीजैसे पहली बार कर मेरेसाथ सेक्स रही हो. उसकी यही अदा मुझे उसका दीवाना बनाए हुए थी. मैंने धीरेसे आकांक्षा को पीछे की तरफ धकेल कर बेड पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर आगया.

मैं कुछ देर तक बिना हिले डुले उसके ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा. जब मेरी तरफ सेकोई भी प्रतिक्रिया नहीं हुईतो आकांक्षा ने आंखें खोल कर मेरी तरफ देखाऔर मुझे मुस्कुराता हुआ देख कर वो और शर्मा गयी. मुझे वो ओर भी ज़्यादाप्यारी लगी.

अब मैंने सीधे अपने होंठ उसके होंठों पर रख दियाजिसका आकांक्षा ने भीस्वागत किया और अपने होंठ खोल दिए. हम दोनों ही होंठों के मिलन में खो गए.कभी मैं उसके होंठ चूसतातो कभी आकांक्षा मेरे होंठ चूसती. कभी आकांक्षाकी जीभ मेरे मुँह में होतीतो कभी मेरी जीभ आकांक्षा के मुँह में.
कुछ देर किस करने के बाद मैं खड़ा हुआ और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए.फिर मैंने आकांक्षा को खड़ा किया और उसके भी सारे कपड़े उतार दिए.

अब हम दोनों ही नंगे थे. मेरा लंड पूरा खड़ा होकर झटके ले रहा थाजिसे देखकर आकांक्षा धीरे धीरेमुस्कुरा रही थी.

मैंने आकांक्षा के पीछे से आकर उसे अपने बांहों में भर लिया और अपनेहोंठ आकांक्षा की गर्दन पर रख दिए. साथ ही मैं अपने हाथों से आकांक्षा कीदोनों चुचियां सहलाने लगा. आकांक्षा इस समय पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थीऔर धीरे धीरे मादक सिसकारियां ले रही थी. धीरे धीरे मैं आकांक्षा की चूचीको सहलाते हुए अपना एक हाथ नीचे चुत पर ले गया और उसकी चुत को सहलाने लगा.चुदास से भरी हुई आकांक्षा एक तरह से मेरी बांहों में तड़प रही थी. उसके ऊपरएक साथ तीन वार जो हो रहे थे.

उसकी गर्दन पर किसएक हाथ से चूची को सहलाना … और तीसरे चुत को सहलाना.मेरा लंड आकांक्षा की गांड की दरार में घुसा हुआ था. कसम से मुझे अपने लंडपर उसकी गर्म गांड की तपिश अलग ही महसूस हो रही थी.

इतने में आकांक्षा ‘आह … ओह उहह..’ करते हुए झड़ गयी और मेरी बांहों में लुढ़क सी गयी.
फिर मैंने आकांक्षा को बेड पर लेटाया और आकांक्षा के पैर उठा कर अपनेकंधे पर रख लिए. मैंने लंड को उसकी चुत पर रख कर धीरे से अन्दर घुसा दिया.

लंड घुसते ही एकदम से आकांक्षा के मुँह से सिसकारी निकल गई- आह हहहहह…

मैं ऐसे ही लंड अन्दर डाले डाले आकांक्षा को किस करने लगा और धीरे धीरेलंड अन्दर बाहर करने लगा. आकांक्षा आंखें बंद किए हुए मादक सिसकियां ले रहीथी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहहहहहहऊउफ़्फ़फ़फ़ … कितने दिन बाद अन्दर गयाहै.
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कुछ मिनट की चुदाई के बाद एक बार फिर से आकांक्षा झड़ गयी. उसने मुझेकसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया था. मैं कुछ देर ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा.फिर जब आकांक्षा की पकड़ थोड़ी ढीली हुईतब मैंने आकांक्षा की चूत से लंडनिकाला और आकांक्षा को डॉगी स्टाइल में खड़े होने को कहा.
आकांक्षा आगे बेड पर झुक कर खड़ी हो गयी. मैंने ढेर सारा थूक अपने लंड परलगाया और लंड आकांक्षा की गांड के छेद पर रगड़ने लगा. जैसे ही आकांक्षा कोअहसास हुआ कि क्या होने वाला है और वो पीछे को मुड़तीमैंने आकांक्षा कीकमर को पकड़ कर लंड को गांड के अन्दर घुसा दिया.
मेरे लंड का सुपारा ही अन्दर गया था कि आकांक्षा चीख उठी- आआईईई मां उफ़्फ़ओहहहहउईईई मार डाला …

आकांक्षा छटपटाने लगी. वो मुझसे अपने को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी. लेकिन मेरी पकड़ मजबूत बनी हुई थी.

आकांक्षा छूटने की साथ लगातार कोशिश किए जा रही थी. वो रो भी रही थी.उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे. उसके दर्द का अहसास मुझे अच्छी तरह से होरहा था … इसलिए नहीं कि वो रो रही थी … बल्कि इसलिए कि गांड के टाइट होनेकी वजह से मेरे लंड में दर्द होने लगा था. मेरे लंड की नसें उभर आई थीं …मुझे ऐसे लग रहा था जैसे लंड को किसी मोटी रस्सी से बांध दिया हो.

आकांक्षा अभी सिसक रही थी और कराहते हुए कह रही थी- आआईईईईईईउफ़्फ़अहहहह … उई मां मर गयी … प्लीजकुणाल तुम्हें मेरी कसम … इसे निकाल लो प्लीज. … बहुत दर्द हो रहा है.

मैंने भी सोचा हुआ था कि अगर आज किला फतेह नहीं हुआतो आगे से दरवाज़ातक छूने को नहीं मिलेगा. मैंने ऐसे ही आकांक्षा को ऊपर से पकड़े पकड़ेपकड़ेहल्का सा ज़ोर लगाना शुरू किया और लंड को और अन्दर तक घुसाने लगालेकिन लंडअन्दर जा नहीं रहा था.

तो मैंने आकांक्षा से बातें करना शुरू कर दीं और उसका ध्यान बंटते हीमैंने अचानक से एक तेज झटका दे मारा. मेरा आधा लंड आकांक्षा की गांड मेंघुस गया.

आकांक्षा फिर से तड़प उठी- आआईईईईईईउफ़्फ़ मर गई उईईअह मां मर गयी … कुणाल बहुत दर्द हो रहा है … ओह्हईईई मां निकाल लो बाहर प्लीज.

लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी और अपने धक्के लगाता रहा. आकांक्षा हर धक्के में रो रही थी और छूटने की कोशिश कर रही थी.
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कुछ देर ऐसे ही धक्के लगाने से गांड का छेद अब थोड़ा खुल गया थाजबकिदर्द आकांक्षा को अभी भी हो रहा था. हालांकि उसे अब पहले जितना दर्द नहींहो रहा था. अब मैं पूरा लंड बाहर निकाल कर अन्दर डाल रहा था.

कुछ देर गांड चोदने के बाद मैंने लंड गांड से निकाला और एक ही झटके में आकांक्षा की चूत में डाल दिया.

आकांक्षा फिर से चीख उठी- आआईईई मां उफ़्फ़ओहहहहउईईई मार डाला … आराम से कुणाल.
मैंने 10-12 तेज धक्के और लगाए और लंड बाहर निकाल कर आकांक्षा के पेट परझड़ने लगा. लंड से सारा वीर्य निकल जाने के बाद मैं आकांक्षा के बराबर मेंही लेट गया.

कुछ देर हम ऐसे ही लेटे रहे. जब थोड़ा होश आयातो मैं उठ खड़ा हुआ.आकांक्षा तब तक टॉयलेट होकर आ गयी थी. वो थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी. उसनेमेरे पास आते ही मेरे गाल पर एक बड़ा ही ज़ोरदार थप्पड़ दे मारा. थप्पड़ लगतेही मैं चकरा गया. तभी आकांक्षा मेरे सीने से लग गयी और रोने लगी.

क्या बताऊं दोस्तों उस वक़्त मुझे आकांक्षा पर कितना प्यार आया. मैंनेअपनी बांहें आकांक्षा पर कस दीं और उसके सर पर किस करके उससे सॉरी बोला.

कुछ देर बाद आकांक्षा शांत हुई … तो हमने कपड़े पहने और कमरे का दरवाजा खोल कर बाहर निकलने लगे.

मैंने देखा कि सामने सुमन भाभी खड़ी हुई हमें ही देख रही थी. वो बड़ी हीअजीब नज़रों से देख रही थी. हम दोनों ने उससे नज़रें चुराईं और नीचे उतर करबाइक पर बैठ कर घर आ गए.
रास्ते में मैंने आकांक्षा को एक पेनकिलर भी खरीद कर दी. फिर आकांक्षा को उसके घर छोड़ा और मैं अपने घर आ गया.

आज मेरे लंड में बड़ा दर्द हो रहा था. मैं सीधा टॉयलेट में गया और पेंटउतार कर देखातो लंड की त्वचा छिल गयी थी. साली पेंट में रगड़ खाने की वजहसे दर्द कर रही थी.

अगले एक हफ्ते तक मैं पेंट के अन्दर क्रिकेट वाला एलगार्ड लगा कर फिरा.

उस दिन के बाद आकांक्षा के पीरियड शुरू हो गए थेतो 4-5 दिन सूखे ही गुजारना था.

एक हफ्ते बाद जब मेरे दोस्त का चाभी के लिए कॉल आयातो मैं उसे चाभी देने गया. जब मैं वापस नीचे आ रहा थातो भाभी मिल गई.

भाभी ने सीधे कहा- क्या बात है कुणाल बहुत दर्द देते हो … ये दर्द सिर्फ खास लोगों को ही देते हो या किसी को भी.

मैं- मैं कुछ समझा नहीं भाभीजी!

भाभी- इतने नादान लगते तो नहीं हो … कुणाल तुम समझ तो गए ही होगे.

ये कहकर वोमुस्कुराती हुई अन्दर चली गयी. उसकी बात का मतलब समझते हुएमैं भी मुस्कुरा दिया और वापस घर आ गया. मुझे भाभी में उम्मीद दिखने लगीथी. उसके साथ चुदाई की कहानी कैसे बनीये आपको अगली बार लिखूंगा.

अगला पार्ट पढ़ने के लिए एक अछि कमेंट करे ताकि हम नयी नयी स्टोरी आप के लिए publish करने का मोटिवेशन मिलती रहे ।  

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