Gaanv Kee Kachchee Kalee Free Hindi Story Part-2


गांव की कच्ची कली

Part-2
मेरे दोस्त की जवान बहन की चूत भी चुदने के लिए उतावली लग रही थी. मुझेमौका नहीं मिल रहा था उसे गर्म करने का. एक दिन मुझे अवसर मिला तो मैंने उसजवान लड़की की कुंवारी चूत को चोद कर कैसे मजा लिया?
Gaanv Kee Kachchee Kalee Free Hindi Story

दोस्तो, मैं निहाल सिंघानिया अपनी देसी सेक्स कहानीका दूसरा भाग प्रस्तुत कर रहा हूं.
अब तक आपने पढ़ा कि मेरे गांव के घर के पास एक राजपूत परिवार में मेराआना जाना था. उनके घर में सोनू नाम के लड़के से मेरी दोस्ती थी.

फिर मैं शहर गया और जब मैं गांव में वापस आया तो सोनू की सबसे छोटी बहननेहा जवान हो चुकी थी. उसके साथ मेरा हंसी मजाक होने लगा. एक दिन मैंनेउसका हाथ पकड़ लिया और मेरा लंड खड़ा हो गया.

अब आगे:
दोस्तो, उस देसी लड़की नेहा के साथ मेरी नोंक झोंक बढ़ती जा रही थी. मैंजानता था कि उसकी चूत में खुजली जरूर मची होगी. अब मैं किसी ऐसे मौके कीतलाश में था कि जब मैं उसको गर्म कर सकूं और उसे पकड़ कर चोद दूं.

एक दिन वो मौका भी मुझे मिल गया. उस दिन मेरे परिवार वाले और उसके घरवाले कहीं बाहर गये हुए थे. मैं ज्यादातर घर पर ही रहना पसंद करता था. उसदिन नेहा भी अपने परिवार के साथ नहीं गयी.

सबके चले जाने के बाद वो मेरे घर पर आई. उसने बताया कि उसके घर वालेबाहर घूमने के लिए गये हुए हैं. मैंने भी उसको बताया कि मेरे घर पर भी कोईनहीं है.

मैंने पूछा- तुम क्यों नहीं गयी?
वो बोली- मेरी तबियत खराब थी, इसलिए मैं नहीं गयी.
मैंने पूछा- क्या हो गया तुम्हें? बुखार तो नहीं हो गया है, दिखाओ मुझे.
जैसे ही मैंने उसके माथे की ओर हाथ बढ़ाया तो वो हँस कर भागने लगी. उसने फिर से मेरे साथ मजाक किया था.

मैंने कहा- अरे रुक, कहां भाग रही है, दिखा, बुखार तो नहीं है.
वो भागते हुए बोली- नहीं दिखाऊंगी, वरना तुम बदमाशी करोगे.
अब तक तो मेरे मन में भी ये ख्याल नहीं आया था. उसके कहने पर मैंने भीसोचा कि आज घर में कोई नहीं है, क्यों न मौके का फायदा उठाया जाये!
मैंने भोलेपन से कहा- अच्छा नहीं करूंगा बदमाशी, एक बार छूने तो दे!

वो धीरे धीरे मेरे पास आई. उसने एक टीशर्ट पहना हुआ था और नीचे पजामी डाली हुई थी.
पहले मैंने उसके माथे को छूकर उसका बुखार चेक किया. फिर मैंने अचानक सेउसका हाथ पकड़ लिया. वो छुड़ाने लगी. मगर आज मुझे किसी का डर नहीं था. घरमें कोई नहीं था और उसके घरवाले भी नहीं थे.

मैंने उसको पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो उसके नींबू के आकार के चूचे मेरेसीने से आ सटे. हम दोनों के जिस्म पहली बार इतना पास में आये थे.

वो बोली- आप फिर से बदमाशी करने लगे, कोई आ गया तो?
नेहा को अपने से चिपकाते हुए मैंने कहा- कोई नहीं आयेगा. आज तो मैं तुम्हें इतनी आसानी से नहीं छोड़ने वाला.

उसने एकदम से मेरे हाथ में झटका दिया और छुड़ाकर भागने लगी. मैंने आंगन मेंजाकर उसको फिर से दबोच लिया और उसको दीवार के साथ में सटा लिया. मैं उसकेचेहरे को देखने लगा.

दोस्तो, ये मेरी कमजोरी है. मैं जब भी किसी लड़की के साथ कुछ करता हूंतो मुझे उसके चेहरे को देखने में बहुत मजा आता है. उसके चेहरे पर जो भावआते हैं उनको देख कर मेरा लंड और तेजी के साथ तनाव में आ जाता है और चुदाईके लिए बिल्कुल तड़प जाता है.

मैं उस देसी लड़की के चेहरे पर अपनी उंगलियों से सहलाने लगा. एक हाथ सेमैंने उसको दबोचा हुआ था और दूसरे हाथ से उसके कोमल से चेहरे पर उंगलियांफिरा रहा था.

उसके गाल एकदम बच्चे के जैसे मुलायम और गोरे थे. मेरा हाथ अब उसकेहोंठों के पास चला गया था. उसके पतले और गुलाबी से मुलायम होंठों को देख करमेरा दिमाग खराब होने लगा. मेरे अंदर का जानवर बाहर आने लगा.

पहले तो मैंने उसके होंठ को प्यार से सहलाया. उसके बाद उसके निचले होंठको अपनी दो उंगलियों के बीच में दबाना और मसलना शुरू कर दिया. अब वो संभलनेलगी और अपने चेहरे को इधर उधर हटाने लगी.

मैं अब जोश में आ चुका था. मैंने उसके बालों को पकड़ कर उसके सिर कोपीछे खींच दिया तो उसे दर्द हुआ और उसके गुलाबी होंठ खुल गये. मैंने उसीक्षण अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया और ये हमारा पहला चुम्बन था.

जैसे ही मेरे होंठ उसके होंठों से लगे तो उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा औरअपने शरीर को ढीला छोड़ दिया. उसकी सांसें तेज हो गयीं. जो लड़कियां इसकहानी को पढ़ रही हैं वो नेहा की हालत को समझ पा रही होंगी, जब किसी के साथपहला चुम्बन होता है तो कैसा लगता है.

अब नेहा मेरे कंट्रोल में हो चुकी थी. फिर मैंने उसके बालों को छोड़दिया और उसकी कमर को थाम कर उसके होंठों को जोर से पीना शुरू कर दिया. उसनेभी अपने हाथ मेरे कंधे पर रख दिये. अब वो जैसे मेरी बांहों में झूल रहीथी. मैंने धीरे धीरे उसके होंठों के साथ खेलना शुरू कर दिया. उसके होंठ भी खुल चुके थे.

10 मिनट तक हम दोनों वहीं बाहर आंगन में एक दूसरे के होंठों को चूसतेरहे. उसको भी मजा आ रहा था. वो खुद ही मेरे होंठों की लार को अपने मुंह मेंखींचने लगी थी. उसके हाथ मेरे कंधे पर कसते जा रहे थे.

मैंने उसके मुंह में जीभ डाल दी और मेरा हाथ उसकी पीठ को सहलाने लगा.मुझे पता लगा कि उसने टीशर्ट के नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी है. ये सोच करमैं और ज्यादा गर्म हो गया. मेरी जीभ और ज्यादा तेजी के साथ उसके मुंह मेंअंदर बाहर होने लगी.

इसी के साथ मैंने उसको कस कर पकड़ा और उसके चूतड़ों को उठा कर अपनी कमरके पास ले आया. उसने भी अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट दिया. आह्ह …दोस्तो, उस पल में उसके होंठों को चूसने में जो आनंद था उसको याद करते हीमेरे लंड में तूफान सा आ जाता है.

उसके होंठों को छोड़ कर मैंने पूछा- कैसा लगा?
वो बोली- आह्ह … इतना मजा कभी नहीं आया भैया.
मैंने कहा- आज के बाद मुझे कभी भैया मत कहना. बाकी सब लोगों के सामने मैंतुम्हारा भैया हूं लेकिन तुम्हारे लिये नहीं. तुम्हारे लिये मैं तुम्हारापति हूं.

मेरी बात पर वो शरमाने लगी. मैंने फिर से उसके होंठों को जोर जोर सेचूसना काटना शुरू कर दिया. वोसिसकारियां लेते हुए अपने होंठों का रस मुझेपिलाने लगी. मैं बार बार उसके होंठ को काट लेता था तो उसकी आह्ह निकल जातीथी.

वो कहती- आह्ह … काटो मत भैया, बहुत दर्द हो रहा है.
जैसे ही वो भैया कहती तो मेरे लंड में और ज्यादा जोश भर जाता और मैं औरतेजी के साथ उसके होंठों को चूसने लगता. इस तरह से हम दोनों की चूसा-चूसीलगभग 20 मिनट तक चली.
उसके होंठों को चूसते हुए ही मैं उसको अंदर ले आया. मैंने उसको नीचे उतारा और उससे कहा- अपनी टीशर्ट उतार!

वो शरमाने लगी. उसने अपने हाथ से अपनी टीशर्ट को पकड़ लिया.
मैं उसके पीछे की ओर गया और उसकी चूचियों को टीशर्ट के ऊपर से ही मसलदिया और दबाने लगा. उसकी सिसकारी निकल गयी. ऐसा मैं हर औरत के साथ करताहूं. जितनी भी आंटियों की चूत चुदाई मैंने की है मैं सबकी चूची पीछे सेदबाता हूं, मुझे इसमें बहुत मजा आता है.

उसकी गर्दन को किस करते हुए मैंने अपनी बनियान उतार दी. उसके आगे आकरमैंने कहा- लो डार्लिंग, मेरे पेट को, मेरी छाती को और मेरे निप्पल को किसकरो. सहलाओ इनको. जो करना चाहती हो, करो इनके साथ, तुम्हें खुली छूट है.

वो देसी लड़की मेरे अधनंगे जिस्म को हवस भरी नजर से देख रही थी. शायदउसकी तमन्ना थी कि वो किसी शहरी लड़के को इस हालत में अपनी आंखों के सामनेदेखे. उसने मेरे निप्पल्स को चूसा और छाती पर किस किया. मेरी सिसकारीनिकलने लगी. फिर वो मेरे पेट को चूमने लगी तो इतने में ही मैंने उसकीटीशर्ट को पकड़ कर उतार दिया.

हाय… एक जवान और सेक्सी देसी लड़की की मस्त मलाई जैसी चूचियां मेरेसामने नंगी हो गयी थीं. वो अपनी चूचियों को अपने हाथों से छिपाने की कोशिशकर रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे मेरे सामने कोई न्यूडफोटोशूट वाली मॉडलखड़ी हुई है.

मैंने नेहा की कुछ फोटो क्लिक कर ली. उसके बाद मैंने प्यार से उसके हाथों को हटाने की कोशिश की लेकिन वो हटा नहीं रही थी.

मैंने गुस्से से उसके हाथों को खींच दिया और उसकी तुरंत उसकी दोनों चूचियोंको अपने हाथों में पकड़ लिया. उसने मेरे हाथों को अपने हाथों से पकड़ लियाऔर कहने लगी- नहीं… मत करो ना… प्लीज, फिर से दर्द होगा.

मैंने कहा- साली, अभी जिसमें तुझे दर्द हो रहा है, थोड़ी देर के बादतुझे उसमें खुद ही इतना मजा आयेगा कि तू खुद ये करने के लिए बोलेगी.

उसके बाद मैंने नेहा की चूचियों को धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया. उसकेसाथ ही मैं उसके होंठों को भी चूसने लगा. धीरे धीरे अब उसने अपने हाथ कोमेरे हाथों से हटा दिया. उसके हाथ अब मेरी गर्दन के ऊपर आकर लिपट गये थे.

अब मैं बिना किसी रुकावट के उसकी चूचियों के साथ खेल रहा था. कभी धीरेसे तो कभी जोर से दबा रहा था. जब भी मैं जोर से दबाता तो उसके मुंह से आह्हनिकल जाती थी. सच कहूं तो मैं ऐसी ही सिसकारी सुनने के लिए इतनी जोर सेदबा रहा था.

अब मैंने धीरे धीरे नीचे आने लगा. उसकी चूचियों को दबाते हुए ही उसकीगर्दन को चूमा. फिर उसकी चूचियों को पीने लगा. उसके मुंह से- आह्ह … उम्म …स्स्सशह … आई या.. ह… करके मस्त कामुक आवाजें निकल रही थीं जिनको सुन करमेरा लंड फटने को हो रहा था.

नेहा की चूचियों को चूस चूस कर मैंने पूरी गीली कर दिया. जैसे ही मैंउसकी निप्पल पर जीभ फिराता तो उसका पूरा शरीर कांप जाता था. वो बस तड़प रहीथी, कभी मजे में और कभी दर्द में।
उसके बाद नीचे की ओर जाते हुए मैंने उसकी नंगी कमर को सहलाया. फिर एकउंगली उसकी नाभि में डाल दी. उसके शरीर में तो जैसे आग लग गयी. फिर मैंनेअपनी जीभ को उसकी नाभि में डाल दिया. जैसे ही मेरी जीभ उसकी नाभि में लगीतो वह आह्ह … उफ्फ… करने लगी.

फिर मैंने उसको नीचे बैठा दिया. उसका मुंह मेरे ट्राउजर के पास था. मेरा लौड़ा तना हुआ था.
मैंने पूछा- तुम्हें पता है इसके अंदर क्या है?
वो शरमाते हुए बोली- नहीं, मुझे नहीं पता.
मैंने कहा- तो फिर मेरी ट्राउजर को नीचे करके देखो न.. क्या है अंदर!
वो बोली- नहीं, मुझे नहीं देखना है.

मैंने तभी उसका हाथ पकड़ा और अपने ट्राउजर के ऊपर से ही अपने खड़े लंड पररखवा दिया. जैसे ही उसके हाथ का स्पर्श मेरे लंड को लगा तो ऐसा महसूस हुआकि मेरा लंड तो आज फट ही जायेगा.
नेहा का हाथ भी मेरे लंड को छूकर कांप रहा था. शायद उसने पहली बार लंडको स्पर्श किया था. 

मगर उसको इस अहसास में मजा आ रहा था. उसने मेरे लंड कोधीरे धीरे से सहलाना शुरू कर दिया. वो इतने धीमे से सहला रही थी जैसे उसकेहाथ में दम ही नहीं है.

जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने कहा- जोर से दबा साली, शादी के बाद भी यही करना है तुझे.
मगर उसने फिर भी नहीं किया.

फिर मैंने उसके हाथ को पकड़ कर अपने ट्राउजर में ही डाल दिया. उसके हाथ परमेरा गीला, खड़ा लंड लगा तो उसने एकदम से हाथ बाहर खींच लिया.

ये देख कर मुझे हँसी आ गयी. उसके बाद मैंने अपने ट्राउजर को खुद ही खोलदिया. अब मेरा लंड उसके सामने था. उसके सामने नाग की तरह फनफना रहा था.नेहा के चेहरे के भाव बता रहे थे कि उसने आज तक लंड असल जिंदगी में नहींदेखा है. वो ध्यान से मेरे लंड को देख रही थी.

उसके बाद मैंने उसके हाथ को अपने लंड पर रखवा दिया और अपने हाथ से हीउसके हाथ को अपने लंड पर ऊपर नीचे करवाने लगा. उसके गोरे मुलायम हाथों सेलंड की मुठ मरवाने का मजा ही कुछ और आ रहा था.

मेरी आंखें बंद हो गयीं. आह्ह … जानेमन … आह्ह… हाय … ऐसे ही कर…. मैंनेदो मिनट के बाद हाथ छोड़ दिया, वो अब भी मेरे लंड को सहलाती रही. मैंआंखें बंद करके मजा लेता रहा. मैं दीवार के साथ लग गया और मस्ती में डूबगया.

मैंने पूछा- नेहा, मुझसे प्यार करती हो?
वो बोली- हां, बहुत ज्यादा.
मैंने कहा- तो फिर अब मेरे लंड को अपने मुंह में लो जान!
उसने धीरे से अपना छोटा सा मुंह खोला और मेरे लंड को मुंह में लेने की कोशिश करने लगी.
लंड का टोपा ही अंदर गया था कि उसने मेरे लंड को बाहर निकाल दिया.

वो बोली- मुझे अच्छा नहीं लग रहा है. इसमें से कुछ निकल भी रहा है. मैं इसको मुंह में नहीं ले सकती.

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा मेरी रानी, सब लड़कियां करती हैं. एक बार पूरा मुंह में लेकर देखो. मजा आयेगा.

मेरे समझाने के बाद उसने मेरे लंड को मुंह में भर लिया. मैं तो जैसेजन्नत की सैर करने लगा. नेहा मेरे लंड को चूसने लगी. उसको भी लंड चूसने मेंमजा आने लगा.

जब मुझसे रुका न गया तो मैंने उसको बेड पर पटका और उसकी पजामी को खींचकर उसकी जांघों से निकाल दिया. उसकी लाल रंग की पैंटी में उसकी छोटी सीदेसी चूत की शेप देख कर मैं पगला गया.

मैंने जोश में आकर उसकी पैंटी को चूसना और चाटना शुरू कर दिया. वो सिहरगयी और मेरे बालों को सहलाने लगी. मैंने जीभ से उसकी चूत की शेप पर जोर सेफिराना शुरू कर दिया तो उसकी सांसें तेजी के साथ चलने लगीं और वो मेरेबालों को खींचने लगी.

फिर मैंने उसकी पैंटी को निकाल दिया. उसकी चूत पर रोएंदार हल्के छोटेबाल थे. चूत एकदम से गोरी थी. ऐसा लग रहा था जैसे सेब पर एक छोटा सा चीरालगा दिया गया होगा.

मैंने उसकी चूत में जीभ अंदर डाल दी और उसकी चूत को चूसने लगा. वोतड़पने लगी. मुझे पीछे धकेलने लगी लेकिन मैं और जोश में आकर उसकी कुंवारीचूत को चूसने लगा.

कुछ ही देर में उसकी चूत इतनी गर्म हो गयी कि उसने मुझे अपने ऊपर खींचलिया और मेरे होंठों को जोर से चूसने लगी. मैंने उसकी देसी चूत पर लंड कोरगड़ना शुरू कर दिया. उस पर मदहोशी छाने लगी.

नेहा की चूत को पहली बार लंड का स्पर्श मिला था. वो बर्दाश्त नहीं कर पारही थी इस आनंद को. उसके बाद मैंने उसकी चूत में एक उंगली दे दी. मैं धीरेधीरे उसकी चूत में उंगली से कुरेदने लगा. वोसिसकारियां भरने लगी.

फिर मैंने तेल की शीशी उठायी और अपने लंड पर बहुत सारा तेल चुपड़ दिया.लंड को तेल में सराबोर करके मैंने उसकी चूत पर लंड के सुपारे को रख दिया.

वो बोली- दर्द तो नहीं होगा ना?
मैंने कहा- बस हल्का सा होगा मेरी जान, उसके बाद जो मजा आयेगा, उसको तुम कभी नहीं भूलोगी.
मैंने उसकी चूत में लंड को अंदर नहीं धकेला बल्कि उसके होंठों को चूसनेलगा. फिर उसकी चूत में धीरे धीरे लंड को नीचे से ही रगड़ता रहा ताकि वो खुदही चुदने के लिए पूरी गर्म हो जाये.

फिर मैंने धीरे धीरे से लंड को चूत के अंदर डालने की कोशिश की. लंड उसकीचूत पर से फिसल रहा था. मैंने एक बार लंड को हाथ से पकड़ कर सही जगह सेटकिया और फिर उसके ऊपर लेट कर एक झटका दे दिया.

नेहा की छोटी सी कुंवारी चूत को भेदते हुए लंड का सुपारा अंदर जा घुसा.नेहा चीखने लगी. मैंने तभी उसके मुंह पर हाथ रखा और उसको चुप रहने का इशाराकिया. उसकी आंखों से पानी बहने लगा.
मैंने कुछ देर उसकी चूचियों और गर्दन को चूसा और चाटा. फिर उसके होंठोंको चूमा. तीन-चार मिनट के बाद उसका दर्द कम हुआ तो मैंने उसकी चूत मेंदूसरा धक्का दिया.

मेरा लंड अबकी बार आधा घुस गया लेकिन नेहा को देख कर ऐसा लगा जैसे वोबेहोश हो जायेगी. मैंने उसके गाल पर हल्का सा चांटा देकर उसको बेहोश होनेसे रोका. किसी तरह उसने खुद को संभाला और मैंने उसको अपने बदन से लिपटालिया.

उसके कोमल जिस्म से लिपट कर मैं आधे लंड को ही उसकी चूत में चलाने लगा.धीरे धीरे उसके हाथ मेरी पीठ पर सहलाने लगे. फिर वो आराम से चूत को चुदवानेलगी.

अब मैं भी मजे में उसकी चूत को चोदने लगा. धीरे धीरे धक्के लगाते हुएमैंने ट्रिक से उसकी चूत में पूरा लंड उतार दिया और उसको दस मिनट तक चोदा.इस बीच वो तीन बार झड़ गयी.

जब लंड बाहर निकला तो उसकी चूत के खून से सना हुआ था. बेड पर धब्बा होगया था. मैंने जल्दी से चादर को धोया और फिर उसकी चूत को भी साफ किया. नेहाको दर्द की गोली लाकर दी. फिर उसको उसके घर तक छोड़कर आया.

उसके बाद तो नेहा खुद ही मेरे लंड तले चुदने के लिए आने लगी. मौका देखकर वो मेरे लंड को पकड़ लेती थी और मैं उसको जमकर चोदने लगा. कुछ ही दिनोंमें मैंने उस गांव की कच्ची कली को चोद चोद कर फूल की तरह खिला दिया.

दोस्तो, ये थी मेरी रियल देसी सेक्स स्टोरी. आपको पसंद आई? मुझे जरूरबतायें. नीचे दी गई ईमेल पर अपना मैसेज भेजें अथवा कमेंटबॉक्स में अपनेकमेंट करें.


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