Student Ki Gaand Mar di A Complete Gay Story In Hindi


Student Ki Gand Mar Di

स्टूडेंट की गाड़ मार दी  

A Complete gay Story

मैं कंप्यूटर सिखाता था. मुझे लड़की चोदने का बड़ा मन था लेकिन नहीं थी.एक चिकना लड़का मेरा क्लास में आता था तो मैंने सोचा कि इस चिकने की गांड सेकाम चलाया जाए.
Student Ki Gaand Mar di A Complete Gay Story In Hindi

वेबसाइट के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. ये मेरी पहली गांड सेक्स कहानी है, कोई गलती हो जाए तो नजरअंदाज कर दीजिएगा.


मेरा नाम राज (बदला हुआ) है, मैं सूरत में रहता हूँ. ये बात कुछ सालपहले की है. उस वक्त मैं राजस्थान में कंप्यूटर सिखाता था और मैं एककम्प्यूटर सेंटर में जॉब कर रहा था. मुझे इधर अकेले रहना पड़ता था, तो मैंबड़ी कामवासना से ग्रसित रहता था.

मैं बस अपने इंस्टीट्यूट में जाता और कंप्यूटर सिखाने का काम पूरा करकेशाम को घर आ जाता था. उस समय कंप्यूटर क्लासेज में कई तरह के लोग आते थे.लड़के लडकियां, आदमी औरत, बच्चे सभी आते थे. मुझे किसी लड़की को पटा कर उसेचोदने का बड़ा मन था, लेकिन साली कोई हाथ ही नहीं रखने देती थी. ऊपर से मेरीक्लास में लगभग लड़के ही होते थे.

मेरी क्लास के लड़के अधिकतर उन्नीस बीस साल के ही थे. उनमें से एक लड़काअंकित था. वो अक्सर देर से क्लास में आता था और पूछने पर हर बार एक नयाबहाना बना देता था.

वो मेरे पास शाम को कंप्यूटर सीखने आता था. शाम के वक़्त ज्यादा छात्रनहीं आते थे. काफी बार तो मैं और अंकित दो ही अकेले रह जाते थे. उसकी उठीहुई गांड देख कर मेरा मन उसे चोदने को करता था. वैसे तो मैं लड़कियों कोचोदने का शौकीन हूं, पर इधर मुझसे कोई लौंडिया पटी ही नहीं थी. इसलिए मुझेअंकित की गांड मारने का जी करने लगा था.

मैं अक्सर उसके पास जाता और उसको खड़ा करके उससे देरी से आने का कारणपूछता. वो मेरी किसी बात का जबाव नहीं देता था, बस यूं ही गुमसुम सर नीचेकिए खड़ा रहता था.

अंकित दिखने में गोरा-चिट्टा और एक गोल मटोल दिखने वाला लड़का था. लेकिनथा वो बिल्कुल सीधा साधा शांत रहने वाला. इसलिए शुरुआत में तो मैंने उससेकुछ नहीं किया. मगर सवाल पूछने पर उसके शांत रह जाने मेरी हिम्मत बढ़ गई औरमैं उसकी गांड पर थपकी देते हुए उससे पूछने लगा. फिर मैं उसकी गांड पर हाथफेर कर मजा लेने लगा. उस दौरान वो भी कुछ नहीं कहता था, बस मुझे हल्का सादेख कर सर नीचे कर लेता था.

फिर एक बार मैंने उसके लंड को दबा दिया, तब भी उसने कुछ नहीं कहा, तोमैंने मन बना लिया कि इसको अपने लंड की आग बुझाने का साधन बनाना ही है.

उसका रेगुलर क्लास में न आना मुझे उसको अपने जाल में लेने के लिए उत्तेजित कर रहा था.
हालांकि मैं अपनी क्लास में बहुत ही सख्ती से काम करता था. इसी सख्ती को लेकर मैंने एक प्लान बनाया.

एक दिन मैंने सभी छात्रों के सामने उससे अपने पेरेंट्स के साथ आने कोबोला. मैंने कहा कि तुम रेगुलरली देर से आते हो और कंप्यूटर भी नहीं सीखनाचाहते हो. तुमने चार महीने में सिर्फ 20 दिन का काम मुश्किल से सीखा होगा.

मैंने उससे अपनी मम्मी पापा को लाने का कहा, तो वो अगले दिन से देर से नहीं आया. मैंने उसकी तरफ देखा, तो वो हल्के से मुस्कुरा दिया.

अगले दिन जब अंकित क्लास में अकेला रह गया, तो मैंने पूछा- तुम्हारे पेरेंट्स क्यों नहीं आए.
उसने कुछ नहीं कहा.

मैंने एक बार फिर से जोर देकर पूछा, तब भी वो कुछ नहीं बोला.
अब मुझे गुस्सा सा भी आने लगा था, तो मैंने उसे डांटना शुरू कर दिया.
वो तब भी कुछ नहीं बोला, बस कंप्यूटर देखता रहा.
मैंने उससे बोला कि तुमने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है. मैं तुमको नंगा कर दूंगा.
वो फिर भी चुप रहा.

अब मुझे कुछ करना था, तो मैंने सच में उसे नंगा करना शुरू किया. सबसे पहले उसकी पैंट की ज़िप खोली.
मैंने उसके लंड को हाथ में लेकर बाहर निकाल लिया और बोला- जवाब दो … वरना बाकी कपड़े भी उतार दूंगा.
मेरी डांट से वो शर्माने लगा.
फिर उस दिन उसको मैंने छोड़ दिया और बोला- आगे से ऐसा न हो … ध्यान रखना मरना अबकी बार तेरी गांड मार दूँगा.

मेरी इस बात से उसके चेहरे पर मुझे डर की जगह मुस्कान दिखी.
एक दो दिन वो सही आया … मगर उसका फिर से वही रवैया हो गया.
कुछ दिन बाद तो अंकित पहले जैसे क्लास में काफी देर आने लगा और देर तकरुकने की कोशिश करने लगा. मैंने उसकी भावना को समझ लिया और उसकी गांड मारनेका अपने मन में निश्चय कर लिया.

तीसरे दिन सभी के जाने के बाद मैं उसके पास गया और डांटते हुए उसे खड़ेहोने का कहा. वो चुपचाप खड़ा हो गया. मैंने उसकी पैंट की ज़िप खोलनी शुरू की.उसने मुझे न रोका और न ही कोई विरोध किया. मैं उसकी तरफ देखते हुए धीरेधीरे उसके लंड को बाहर निकालने लगा.

वो एकदम चुप रहा, तो मैंने आज उसकी गांड मारने की सोच ली. अगले कुछ हीपलों में मैंने उसकी पैंट उतार कर उसे पूरा नंगा कर दिया. उसका लंड मुरझायासा लटका था.

मैं बोला- अंकित जवाब दो, वरना मैं अपना लंड निकाल कर तेरे मुँह और गांड में दे दूंगा.
वो बोला- सर पेरेंट्स शादी में गए थे … इसलिए लेट हो गया. आपको जो सजा देना हो, आप दे दीजिएगा.

उसकी इस बात से मेरे दिमाग में उसकी गांड छप चुकी थी. मेरा लंड अब भीउसकी गांड के पीछे पड़ा हुआ था. मैं उससे बारे में पूछता रहा और उसकी गांडको सहलाता रहा. उसका लंड हरकत में आने लगा.

जब मुझे लगा कि वो थोड़ा सा मस्त हो रहा है … तो मैंने अपना 7 इंच का लंड निकाल कर उसके हाथ में दे दिया.

मैंने उससे कहा- चूस इसको.
उसने अपने कोमल हाथ में जैसे ही मेरा लंड पकड़ा, मेरा लंड फुंफकारता हुआ टाइट हो गया.
वो एकटक मेरे लंड को निहारता रहा.
मैंने बोला- जल्दी से चूस इसको.
वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगा. मुझे उसके मुँह में अपने लंड के जानेसे मजा आने लगा और मैं अपनी शर्ट ऊपर उठा कर उससे लंड चुसवाने का मजा लेनेलगा.

काफी देर लंड चुसवाने के बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया … लेकिन वो मेरा लंड चूसता ही रहा. इससे मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

अब बारी थी उसकी कोमल सफेद गांड मारने की. मैंने उसकी पैंट तो उतार हीदी थी. मैंने उसको कम्प्यूटर टेबल के सहारे झुका कर खड़ा किया और फिर अपनालंड उसकी गांड पर रगड़ने लगा.
उसने भी मस्ती से अपनी गांड फैला ली थी. धीरे धीरे मैं उसकी गांड कीदरार पर अपने लंड को दबाने लगा. लेकिन ये मेरा पहली बार था. मैंने आज सेपहले किसी के साथ सेक्स नहीं किया था. क्योंकि अब तक मेरी कोई गर्लफ्रेंडबनी ही नहीं थी और न ही मैंने किसी रंडी से साथ सेक्स किया था.

मैंने उसके छेद में लंड डालने की कोशिश की. मेरी पहली कोशिश में तो मेरालंड उसकी गांड के छेद से खिसक गया. लेकिन बाद में मैंने लंड को उसकी गांडके छेद के निशाने पर रख कर हल्का सा दबाव डाला, तो उसकी आह निकल गई. शायदउसके छेद में मेरे लंड का मुहाना टच हो गया था. मगर मैंने देखा कि अभी मेरालंड अन्दर नहीं घुसा था.

मैंने आगे हाथ करके उसके लंड को पकड़ा और उसे हिलाने लगा. मेरे ऐसा करते ही अगले ही पल से वो मस्ती में आह आह करने लगा.

मैंने मौका देख कर अपना लंड उसकी गांड में डालना चाहा … सुपारे ने एकबार फिर से छेद को चीरना चाहा, लेकिन दर्द के मारे उसने मेरा लंड अन्दरजाने ही नहीं दिया.
वो कहने लगा- दर्द हो रहा है.

मैंने- क्यों हो रहा है बे … अन्दर तो जाने दे, फिर मजा आएगा.
वो बोला- सूखा कैसे अन्दर जाएगा.

उसकी इस बात से मैं एक पल के लिए ठिठका. वो सही था … मैं बिना किसीचिकनाई के सूखे लंड को उसकी गांड में डाल रहा था. इससे दर्द होना लाजिमीथा.

फिर मैंने लंड बाहर निकाल कर बहुत सारा थूक उसकी गांड में डाला और अपने लंड पर भी लगाया.
अबकी बार मैंने उसके लंड को एक बार जोर से आगे पीछे किया और उसके मस्त होते ही मैंने फिर से लंड से धक्का दे मारा.

इस बार मेरे लंड का टोपा उसकी गांड में घुसता चला गया. वो एक बार दर्दसे छटपटाया और चुदवाने से मना करने लगा. लेकिन मैंने उसकी एक न सुनी औरउसको टेबल पर फिर से झुका कर थोड़ा और जोर लगा अपना एक इंच लंड और अन्दर डालदिया.

धीरे धीरे आधा लंड पेल कर मैं उसके लंड को हिलाने लगा और उसकी गोटियों को मसलने लगा. इससे उसको दर्द और मज़ा दोनों आने लगा.

फिर थोड़ी थोड़ी देर में हल्के धक्के देते हुए मैंने अपना आधे से ज्यादालंड उसकी गांड में डाल दिया और आगे पीछे करने लगा. कुछ ही देर में मैंनेपूरा लंड अन्दर पेल दिया. कुछ ही देर में उसे राहत मिलने लगी और वो भी मजालेने लगा.

दस मिनट तक गांड मारने के बाद मैंने अपना लंड निकाल लिया और लंड का पानीहाथ से झाड़ कर खुद को ठंडा कर लिया. उधर उसने भी अपने लंड की मुठ मार लीथी.

फिर मैंने उसको एक किस करके घर भेज दिया. उसके जाने के बाद मैं भी अपने घर आ गया.
अगले दिन जब वो आया, तो सबके जाने के बाद मैंने फिर से उसको टेबल पर झुकाया और एक ही झटके में आधा लंड डाल दिया.

वो फिर से चिल्लाया और उसने मेरा लंड बाहर निकाल दिया. दुबारा में वो गांड में लंड लेने से मना करने लगा.

मैंने उसे थोड़ा समझाया कि थोड़ी देर में कल जैसा मज़ा आएगा. कुछ देर बादवो मान गया. इस बार मैंने उसे टेबल के सहारे नहीं खड़ा किया. इस बार मैंनेउसे अपनी गोद में बिठा लिया और लंड पेल कर जोर जोर से झटके देने लगा.

उसने मुझसे छूटने की बड़ी कोशिश की, लेकिन छूट नहीं पाया. इस पोजीशन मेंधीरे धीरे करके मेरा पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया था. मैं लगातार उसकेलंड को हाथ से हिला रहा था उसकी गोटियों को भी सहला रहा था, जिससे उसे भीमजा आ रहा था.

कुछ देर बाद मैंने उसे जमीन पर पेट के बल लिटाया और पीछे से उसकी गांडमें लंड डाल कर झटके मारने लगा. कुछ मिनट बाद मैंने उसको पलटा और उसकीदोनों टांगों को उठा कर पूरे जोर से उसकी गांड को रगड़ा.

करीब 15 मिनट तक चली इस चुदाई में हम दोनों थक गए और पसीना पसीना हो गए थे.
इसके बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक किए और थोड़ी देर में घर चले गए.
अगले दिन मैंने फिर से उसे कल जैसे ही चोदा. इस बार वो भी मेरे साथ मज़े ले रहा था.

उस दिन के बाद से अंकित मेरा पक्का चुदाई का माल बन गया. कम्प्यूटरसीखने के टाइम जब भी मैं उसके पास जाता, वो खुद से मेरा लंड निकाल कर चूसनेलगता और घर जाने से पहले अगर दोनों अकेले होते, तो वो मुझसे गांड भी मरवाकर जाता.

ये थी मेरी पहली और सच्ची गांड सेक्स कहानी. मुझे आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा.



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